
विमान दुर्घटनाग्रस्त होने वाला था सो चारो कूद गए ! हिन्दू को छोड़कर सारे बच गए ! हिन्दू की आत्मा को यमराज लेकर जाने लगे तो उसने यमराज से पूछा की "मै ही सिर्फ क्यों मरा बाकी कैसे बच गए?"
यमराज ने कहा की विपदा में आप सभी अपने ईस्ट देवता का नाम ले रहे थे ,मुसलमान अल्लाह को ,इसाई जीजस को और सिख वाहे गुरु को... पर आप कभी दुर्गा जी को कभी हनुमान जी को कभी शिव जी को कभी ब्रम्हा जी को याद कर रहे थे अतः देवता दुविधा में रह गए की आपको कौन बचाने जाए फलस्वरूप आप गति को प्राप्त को गए!
तो भैया यु ही श्रीमद भागवत में श्री कृष्ण ने नहीं कहा है की "संघे शक्ति कल्युगे" !!!
6 comments:
मकसद तो ठीक है पर विवरण सही नहीं है।
बास्तब में ये बात समुद्री जहाज के डबूने से जुड़ी है जिसमें सब मुसलमान व इसाई सिर्फ अपने एक इशु व अल्लहा का नाम लेकर बहुत जल्दी बचने लगे लेकिन हिन्दूओं को बचाने वाला कोई नहीं दिखाई दे रहा था क्योंकि वो अपने सभी भगवानों का अपने-अपने हिसाब से नाम ले रहे थे। लेकिन तभी अचानक सभी भगवान एक साथ आ गए और सबके सब हिन्दू बच गए जबकि कुछ ईसाईयों व मुसलमानों को छोड़कर वाकी सब ईसाई व मुसलमान मर गए आखिर क्यों क्योंकि उनको बचाने वाला मात्र एक-एक था जबकि हिन्दूओं को बचाने वाले हजारों देवी-देबता।
सब हिन्दूओं को ध्यान रखना चाहिए कि एकता में बल है बस मकसद एक होना चाहिए वेशक रास्ते अलग-अलग हों।
गूढ़ ज्ञान...सोचने पर मजबूर किया...आभार
गूढ़ ज्ञान...सोचने पर मजबूर किया...आभार
हा आप सही कह रहे है मुसलमान तो बच ही जायेगा ,आखिर इतने जानवरों की हत्या का पुण्य जो है ,
भगवान् एक है ये शयद आप को याद नही होगा ,उस भगवान् को हिन्दू कई रूपों में पूजता है
आदमी की गति उसके कर्म तय करते है
चलो हिन्दू कम से कम मानुष की पूजा करता है ,मुसलमान तो लाशो की पूजा करता है
आप का मकसद और विवरण सही नहीं है।
सुनील जी मरने वाला हिन्दु ही था पर कहानी गलत दी है यहां पर, वो हिन्दु गा रहा था "ईश्वर तेरो नाम अल्ला तेरो नाम, सबको सन्मति दे भगवान"
कांग्रेसी नेता इस बात का जी तोड़ प्रयत्न कर रहे हैं कि किसी प्रकार से सत्ताधारी परिवार (दल नही परिवार) की छवि गरीबों के हितैषी के रूप मे सामने आए, इसके लिए वो छल छद्म प्रपंच इत्यादि का सहारा लेने से भी नही चूकते। इसकी जोरदार मिसाल आपको नीचे के चित्र मे मिल जाएगी
http://bharathindu.blogspot.com/2011/03/blog-post.html?showComment=1299158600183#c7631304491230129372
Post a Comment